होली आयी

होली आयी , होली आयी
मुझे फिर बुलाती है ।
रायगढ़ की वो होली ,
हर साल याद आती है ।

सहेलियों के गालों का गुलाल ,
रंगों की गीली फुहार ,
हर साल भीगा जाती है
मुझे फिर बुलाती है ।

मेरे बहनों की टोली
और वो रंगों का मिटाना
हर साल रुला जाती है ,
मुझे फिर बुलाती है ।

नगाड़ों की आवाज़ , फाग के गीत
शाम को ढोल की आरती
हर साल कानों में गूँज जाती है ।
मुझे फिर बुलाती है ।

रंगों में भीगे पापा , गुलाल में लाल माँ
भाइयों की हुल्लड़बाजियां
हर साल रस घोल जाती हैं
मुझे फिर बुलाती है ।

होली आयी , होली आयी ।

2 responses to “होली आयी”

  1. Very nice lines….superb ….raigarh ki holi apno ke beech ki holi, doston sang holi sach main bahut yaad aati hai…
    Aasha karte hain aap hamesha likhti rahengi….
    Aap bahut hi achha likhti hain…kripya likhte rahiye…

    Liked by 1 व्यक्ति

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