होली आयी , होली आयी
मुझे फिर बुलाती है ।
रायगढ़ की वो होली ,
हर साल याद आती है ।
सहेलियों के गालों का गुलाल ,
रंगों की गीली फुहार ,
हर साल भीगा जाती है
मुझे फिर बुलाती है ।
मेरे बहनों की टोली
और वो रंगों का मिटाना
हर साल रुला जाती है ,
मुझे फिर बुलाती है ।
नगाड़ों की आवाज़ , फाग के गीत
शाम को ढोल की आरती
हर साल कानों में गूँज जाती है ।
मुझे फिर बुलाती है ।
रंगों में भीगे पापा , गुलाल में लाल माँ
भाइयों की हुल्लड़बाजियां
हर साल रस घोल जाती हैं
मुझे फिर बुलाती है ।
होली आयी , होली आयी ।
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