प्रियतम को रिझाने
चली रमणी श्रृंगार कर
होठों में लाली, आँखों में कजरा
और वस्त्र रेशमी
अंत में लाज की चुनर धार
प्रियतम का मन अकुलाया
रूप अप्रतिम देखकर
लाज का चुनर उठाया
हाथ से धरकर
फिर लाली मिटाया
उसने छूकर
एक-एक कर दिया
वस्त्र तार-तार
फिर चूड़ी टूटी
गिर गया गलहार
अंत में कजरा रोया
आँखों से बह धार
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