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ओ सजनी, ओ सजनी !रूप तेरा श्यामल, सुकोमल,सुन्दर, चंचल, निश्छल। ना आँखों में काजल का पहरा,ना अधर लाली गहरा।केशों में रात स्याह उलझ रही,और लट नटखट भी खेल रही। ओ सजनी, ओ सजनी !रूप तेरा श्यामल, सुकोमल | जो कटी कमान सी तूने तानी,किंकिनि भी अंग लगकर हुई अभिमानी।बड़ी भागी रे, पांव को चूमती झांझन,और… Read.