• बनारस के घाटों सा पावन प्रेम हमारा,अंत से आदि, आदि से अंत, प्रियतम संग तुम्हारा।बनारस की घाटों सा पावन प्रेम हमारा। मैं बन जाऊं बांसुरी तेरी,अधरों से छूके छेड़ दे तान कोई,राग-राग हो प्रणय,हर ताल में हो अपना मिलन। बनारस की घाटों सा पावन प्रेम हमारा । मैं बन जाऊं कविता तेरी,हाथों से लिख दे… Read.

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