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नक़ाबबाज़ार में कई नक़ाब हैं,पर सबसे खूबसूरतनक़ाब है, दोस्ती का। उसने नक़ाब पहनकरपूछा मेरा हाल,पता है, ‘दर्द है,दर्द क्या है?’ मैंने भी चाहा,बताना अपना हाल,दिल का दर्द,चोट का निशान। पर चेहरा नहीं दिखता,दिखता है, नक़ाब,औरबाज़ार में कई नक़ाब हैं। Read.
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नक़ाबबाज़ार में कई नक़ाब हैं,पर सबसे खूबसूरतनक़ाब है, दोस्ती का। उसने नक़ाब पहनकरपूछा मेरा हाल,पता है, ‘दर्द है,दर्द क्या है?’ मैंने भी चाहा,बताना अपना हाल,दिल का दर्द,चोट का निशान। पर चेहरा नहीं दिखता,दिखता है, नक़ाब,औरबाज़ार में कई नक़ाब हैं। Read.