• खुली हवा में सांसें लेना,एक सपना सा लगता है।हरी वादियां देख पाना,अब नामुमकिन लगता है।हर तस्वीर धुंधली लगती है,आँखों की चमक कोहराती है।सुर-ताल का पता नहीं,बस खों- खों की थाप सुनाई देती है।मानव नहीं हम महामानव बन रहे हैं,शिव सा विष पी रहे हैं।धन दौलत तो दे देंगे,पर बच्चों को क्या सेहत दे पाएंगे ?जब… Read.

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