प्रतीक्षा नहीं भाती

प्रिय सुनो,
ये प्रतीक्षा नहीं भाती है
मुझे सौतन लगती है
मिलन में बाधा सी लगती है

प्रिय सुनो,
कुछ करो उपाय
यह पीड़ा असह्य
कब तक सहूँ, हाय?

प्रिय सुनो,
ये दांव खेलती है
मन में शंका बोती है
तुम्हे आने से रोकती है

प्रिय सुनो,
अब तुम साक्ष्य रखना
चाँद, तारे सबसे कहना
संग प्रतीक्षा न लाना
प्रिय सुनो
संग प्रतीक्षा न लाना

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